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गंगाधर मुटे |
गाय,वाघ आणि स्त्री |
नाही. |
हो |
465 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
अशीही उत्तरे - भाग -१ |
नाही. |
हो |
373 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
हृदय तोड दे - दगा जर दिला - कारावके |
नाही. |
हो |
67 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
कापूसप्रश्नी मुख्यमंत्र्यांशी चर्चा फ़िस्कटली |
नाही. |
हो |
138 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
कापसाचा उत्पादन खर्च. |
नाही. |
हो |
412 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
अस्तित्व दान केले |
नाही. |
हो |
503 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
क्षण एक पुरे जगण्यास खरा |
नाही. |
हो |
347 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
कापूस व धान उत्पादक परिषद - सचित्र वृत्तांत |
नाही. |
हो |
625 |
प्रासंगिक |
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गंगाधर मुटे |
शाप आदीमायाशक्तीचा......! |
नाही. |
हो |
320 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
मराठीभाषा : शुद्धी आणि समृद्धी |
नाही. |
हो |
322 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
कुठे लुप्त झाले फुले-भीम-बापू? |
नाही. |
हो |
1,268 |
कविता स्पर्धा २०११ |
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गंगाधर मुटे |
ते शिंकले तरीही.....! |
नाही. |
हो |
667 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
चला कॅरावके शिकुया...! |
नाही. |
हो |
1,247 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
कापूस व धान उत्पादक परिषद |
नाही. |
हो |
194 |
प्रासंगिक |
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गंगाधर मुटे |
अ आ आई |
नाही. |
हो |
181 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
प्रक्रिया उद्योग आणि शिक्षणपद्धती |
नाही. |
हो |
700 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
बत्तीस तारखेला |
नाही. |
हो |
292 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
सत्तास्थळ हेच भ्रष्टाचाराचे सर्वात मोठे तीर्थक्षेत्र : उत्तरार्ध |
नाही. |
हो |
803 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
बरं झालं देवाबाप्पा.....! |
नाही. |
हो |
426 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
गणपतीची आरती |
नाही. |
हो |
270 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
सत्तास्थळ हेच भ्रष्टाचाराचे सर्वात मोठे तीर्थक्षेत्र : लेखांक - १ |
नाही. |
हो |
466 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
प्रचलित व्यवस्थेत भ्रष्टाचाराची अनिवार्यता : लेखांक - ३ |
नाही. |
हो |
858 |
आस्वाद |
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गंगाधर मुटे |
भ्रष्टाचार्यास हाण पाठी : पोवाडा |
नाही. |
हो |
1,857 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
राखेमधे लोळतो मी (हजल) |
नाही. |
हो |
990 |
काव्य |
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गंगाधर मुटे |
अनादि काळापासूनच भ्रष्टाचाराचा उगम : लेखांक - २ |
नाही. |
हो |
497 |
आस्वाद |